शायरी मोहब्बत का एक चेहरा कितना मासूम होता है ना जिस के एक छोर से झांकती हुई तुम और तुम्हारे कानों के बगल से हिचकोले खाती वो तुम्हारी कुछ जुल्फें जिसको तुम कहीं बार अपने कानों के पीछे करती। पर वो फिर भी तुम्हारे चेहरे पर आ जाती मानो उन्होंने कसम खाली हो कि मुझे तुम्हारी आंखों में झांकने नहीं देंगी। मानो ज़िद्दी हो किसी पांच साल के चुलबुले बच्चे की तरह जो अपनी सबसे पसंदीदा चीज किसी के साथ बांटना नहीं चाहता हो Kaushik jazbaat
Search This Blog
Chand ke naam